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सिंगापुर में आज राहुकाल
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शहर
सिंगापुर
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
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शुभ और अशुभ समय
- राहुकालनई शुरुआत टालें
- 3:47 PM से 5:17 PM (90 मिनट)
- यमगंडनई शुरुआत टालें
- 9:49 AM से 11:18 AM (90 मिनट)
- गुलिक कालनई शुरुआत टालें
- 12:48 PM से 2:18 PM (90 मिनट)
- अभिजित मुहूर्तशुभ
- 12:24 PM से 1:12 PM (48 मिनट)दिन का मध्य मुहूर्त, स्थानीय दोपहर के आसपास।
- ब्रह्म मुहूर्तशुभ
- 5:13 AM से 6:01 AM (48 मिनट)इस दिन के सूर्योदय से पहले।
सूर्योदय के समय पंचांग के पाँच अंग
- तिथि
- प्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)
- प्रतिपदा 9:32 AM तक, फिर द्वितीया 6:37 AM, 28 अक्टूबर तक, फिर तृतीया 3:37 AM, 29 अक्टूबर तक
- नक्षत्र
- भरणी
- भरणी 6:09 PM तक, फिर कृत्तिका 3:56 PM, 28 अक्टूबर तक
- योग
- सिद्धि
- सिद्धि 1:22 PM तक, फिर व्यतीपात 9:48 AM, 28 अक्टूबर तक
- करण
- कौलव
- कौलव 9:32 AM तक, फिर तैतिल 8:06 PM तक, फिर गर 6:37 AM, 28 अक्टूबर तक, फिर वणिज 5:07 PM, 28 अक्टूबर तक
- वार (दिन)
- मंगलवार
- स्वामी: मंगल। पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
- चंद्र राशि
- मेष
- मेष 11:36 PM तक, फिर वृषभ 12:36 AM, 30 अक्टूबर तक। सूर्य तुला राशि में है।
सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त
- सूर्योदय
- 6:49 AM
- सूर्यास्त
- 6:47 PM
- दिन की लंबाई
- 11 घंटे 57 मिनट
- चंद्रोदय
- 7:51 PM
- चंद्रास्त
- 7:26 AM
- अगला सूर्योदय
- 6:49 AM, 28 अक्टूबर
चौघड़िया
| समय | चौघड़िया | गुणवत्ता |
|---|---|---|
| 6:49 AM से 8:19 AM | रोग | टालें |
| 8:19 AM से 9:49 AM | उद्वेग | टालें |
| 9:49 AM से 11:18 AM | चर | सामान्य |
| 11:18 AM से 12:48 PM | लाभ | अनुकूल |
| 12:48 PM से 2:18 PM | अमृत | अनुकूल |
| 2:18 PM से 3:47 PM | काल | टालें |
| 3:47 PM से 5:17 PM | शुभ | अनुकूल |
| 5:17 PM से 6:47 PM | रोग | टालें |
| समय | चौघड़िया | गुणवत्ता |
|---|---|---|
| 6:47 PM से 8:17 PM | काल | टालें |
| 8:17 PM से 9:47 PM | लाभ | अनुकूल |
| 9:47 PM से 11:18 PM | उद्वेग | टालें |
| 11:18 PM से 12:48 AM, 28 अक्टूबर | शुभ | अनुकूल |
| 12:48 AM से 2:18 AM, 28 अक्टूबर | अमृत | अनुकूल |
| 2:18 AM से 3:49 AM, 28 अक्टूबर | चर | सामान्य |
| 3:49 AM से 5:19 AM, 28 अक्टूबर | रोग | टालें |
| 5:19 AM से 6:49 AM, 28 अक्टूबर | काल | टालें |
होरा (ग्रहों के घंटे)
| समय | होरा स्वामी |
|---|---|
| 6:49 AM से 7:49 AM | मंगल |
| 7:49 AM से 8:49 AM | सूर्य |
| 8:49 AM से 9:49 AM | शुक्र |
| 9:49 AM से 10:49 AM | बुध |
| 10:49 AM से 11:48 AM | चंद्र |
| 11:48 AM से 12:48 PM | शनि |
| 12:48 PM से 1:48 PM | गुरु |
| 1:48 PM से 2:48 PM | मंगल |
| 2:48 PM से 3:47 PM | सूर्य |
| 3:47 PM से 4:47 PM | शुक्र |
| 4:47 PM से 5:47 PM | बुध |
| 5:47 PM से 6:47 PM | चंद्र |
| समय | होरा स्वामी |
|---|---|
| 6:47 PM से 7:47 PM | शनि |
| 7:47 PM से 8:47 PM | गुरु |
| 8:47 PM से 9:47 PM | मंगल |
| 9:47 PM से 10:48 PM | सूर्य |
| 10:48 PM से 11:48 PM | शुक्र |
| 11:48 PM से 12:48 AM, 28 अक्टूबर | बुध |
| 12:48 AM से 1:48 AM, 28 अक्टूबर | चंद्र |
| 1:48 AM से 2:48 AM, 28 अक्टूबर | शनि |
| 2:48 AM से 3:49 AM, 28 अक्टूबर | गुरु |
| 3:49 AM से 4:49 AM, 28 अक्टूबर | मंगल |
| 4:49 AM से 5:49 AM, 28 अक्टूबर | सूर्य |
| 5:49 AM से 6:49 AM, 28 अक्टूबर | शुक्र |
समय सिंगापुर का स्थानीय घड़ी समय है; सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय नवांश (Navamsha) ज्योतिष API से हैं।
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सिंगापुर में राहुकाल 3:47 PM से 5:17 PM है, यानी 1 घंटे 30 मिनट। यमगंड 9:49 AM से 11:18 AM और गुलिक काल 12:48 PM से 2:18 PM है। ये सिंगापुर के सूर्योदय (6:49 AM) और सूर्यास्त (6:47 PM) से निकाले गए हैं, और मंगलवार को राहुकाल दिन के आठ बराबर भागों में से हमेशा सातवाँ भाग होता है।
राहुकाल रोज़ का लगभग डेढ़ घंटे का वह समय है जो सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के दिन का आठवाँ भाग होता है, और जिसे पंचांग की परंपरा छाया ग्रह राहु के नाम से जोड़ती है। बहुत से परिवार इस दौरान कोई नया काम शुरू करने से बचते हैं।
सिंगापुर के लिए पंचांग के और समय
- सिंगापुर में चौघड़ियाचौघड़िया दिन को और फिर रात को आठ बराबर भागों में बाँटता है, और हर भाग को सात नामों में से एक मिलता है जो बताता है कि वह समय कुछ शुरू करने के लिए अनुकूल, सामान्य या टालने योग्य है।
- सिंगापुर में होराहोरा ग्रहों का एक घंटा है।
- सिंगापुर में अभिजित मुहूर्तअभिजित मुहूर्त दिन के पंद्रह मुहूर्तों में बीच वाला मुहूर्त है, जो स्थानीय सूर्य-मध्याह्न पर केंद्रित होता है।
दूसरे शहरों में राहुकाल
भारत
राहुकाल (Rahu Kaal) क्या है
राहुकाल (राहु काल, राहुकालम) दिन का वह हिस्सा है जिसका स्वामी राहु माना जाता है, जो वैदिक ज्योतिष के दो चंद्र-पातों में से एक है। जिन परंपराओं में इसे माना जाता है, उनमें इसे कोई नई चीज़ शुरू करने के लिए अच्छा समय नहीं माना जाता, जैसे अनुबंध पर हस्ताक्षर, यात्रा की शुरुआत, कोई बड़ी चीज़ खरीदना या दुकान खोलना। जो काम पहले से चल रहा हो, उसे इसके लिए रोका नहीं जाता।
यह एक रीति है, ऐसा नियम नहीं जिसे ज्योतिष की हर शाखा मानती हो। बहुत से लोग इसे नहीं मानते, और जो मानते हैं वे अकसर डर से नहीं बल्कि आदत और पारिवारिक परंपरा से मानते हैं। इसमें आगे क्या होगा, इसकी कोई भविष्यवाणी नहीं है।
गणना कैसे होती है
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। इनमें से कौन-सा भाग राहुकाल है, यह वार पर निर्भर करता है: रविवार को आठवाँ, सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवाँ, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, शुक्रवार को चौथा और शनिवार को तीसरा भाग।
दिन को उस जगह के असली सूर्योदय और सूर्यास्त से बाँटा जाता है, इसलिए राहुकाल हर शहर में घड़ी के अलग समय पर पड़ता है और रोज़ थोड़ा बदलता है। "सोमवार 7:30 से 9:00 बजे" जैसी तालिकाएँ केवल वहीं सही हैं जहाँ सूरज 6:00 बजे उगता और 6:00 बजे डूबता हो। इसी विधि से यमगंड और गुलिक काल भी निकलते हैं, जो दिन के दो और आठवें भाग हैं और जिन्हें कई परिवार नई शुरुआत के लिए टालते हैं।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
यमगंड दिन का वह आठवाँ भाग है जो यम से जुड़ा माना जाता है, और गुलिक काल वह जो गुलिक से जुड़ा है, जिन्हें परंपरा में शनि का पुत्र कहा गया है। ज़्यादातर पंचांगों में ये दोनों राहुकाल के साथ दिए जाते हैं। हर वार में ये अलग-अलग आठवें भाग में पड़ते हैं, इसलिए अधिकतर दिनों में तीनों अवधियाँ एक-दूसरे पर नहीं चढ़तीं।
इन समयों का उपयोग कैसे करें
अपने मौजूदा शहर का समय देखें, उस शहर का नहीं जहाँ से आप आए हैं: ये अवधियाँ स्थानीय सूर्योदय के साथ खिसकती हैं। यात्रा पर हों तो उस जगह का पंचांग देखें जहाँ वह काम होगा।
इसे एक रीति की तरह लें जिसके हिसाब से योजना बनाई जा सके, चिंता की बात की तरह नहीं। चिकित्सा, ज़रूरी यात्रा और आपात स्थितियाँ इसके कारण कभी टाली नहीं जातीं।
सिंगापुर के समय के बारे में
सिंगापुर लगभग भूमध्य रेखा पर है, इसलिए यहाँ हर दिन करीब बारह घंटे का होता है और हर राहुकाल लगभग 90 मिनट का।
ये समय कैसे निकाले गए हैं
सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त नवांश (Navamsha) ज्योतिष API से आते हैं; जहाँ वह उपलब्ध नहीं होता वहाँ हमारा अपना इंजन इन्हें निकालता है, जो उससे एक सेकंड के अंश तक मेल खाता है। हर तिथि, नक्षत्र, योग और करण कब खत्म होता है, यह वही इंजन सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (NASA JPL DE421 ephemeris) से निकालता है, निरयन राशिचक्र और लाहिड़ी अयनांश में। राहुकाल, चौघड़िया, होरा, अभिजित मुहूर्त और बाकी अवधियाँ सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाले गए दिन के तय अंश हैं।
पंचांग सूर्योदय की परिभाषा अलग-अलग रखते हैं। यहाँ सूर्य तब उगता है जब उसके बिंब का केंद्र क्षितिज पर होता है, वायुमंडलीय अपवर्तन को गिने बिना। जो पंचांग सूर्य के ऊपरी किनारे और अपवर्तन को लेते हैं, वे सूर्योदय कुछ मिनट पहले और सूर्यास्त कुछ मिनट बाद दिखाते हैं, और उनके राहुकाल और बाकी अवधियाँ भी उसी के साथ खिसकती हैं। किसी अनुष्ठान के लिए वही पंचांग देखें जो आपके पुरोहित या स्थानीय मंदिर में चलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज सिंगापुर में राहुकाल कब है?
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सिंगापुर में राहुकाल 3:47 PM से 5:17 PM है।
राहुकाल क्या होता है?
राहुकाल दिन के समय का एक आठवाँ भाग है (12 घंटे के दिन में लगभग 90 मिनट) जिसे पंचांग की परंपरा राहु को देती है। बहुत से लोग इसमें नया काम शुरू करने से बचते हैं। यह एक रीति है, भविष्यवाणी नहीं।
राहुकाल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, और वार के हिसाब से राहुकाल वाला भाग तय होता है: रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा।
हर शहर में राहुकाल का समय अलग क्यों होता है?
क्योंकि यह स्थानीय दिन का एक अंश है। जो शहर जितना पूर्व में है, वहाँ सूर्योदय उतना जल्दी होता है, और भूमध्य रेखा से दूर के शहरों में दिन लंबा या छोटा होता है, इसलिए हर शहर के राहुकाल का शुरू और खत्म होने का घड़ी-समय अलग होता है।
क्या राहुकाल में काम रोक देना चाहिए?
नहीं। परंपरा नया काम शुरू करने से बचने को कहती है, चल रहे काम को रोकने को नहीं। आपात स्थिति और चिकित्सा के लिए इसे कभी नहीं टाला जाता।
पंचांग क्या है?
पंचांग हिंदू पंचांग-पत्रिका है। यह हर दिन के पाँच अंग बताता है: तिथि (चंद्र दिन), वार, नक्षत्र, योग और करण, और साथ में सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन के समय जैसे राहुकाल, चौघड़िया, होरा और अभिजित मुहूर्त।
पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?
किसी भी क्षण चंद्रमा की स्थिति हर जगह एक ही होती है, पर पंचांग का दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू होता है और हर समय-अवधि स्थानीय दिन का अंश है, इसलिए घड़ी का समय शहरों में अलग होता है।
और मुफ़्त टूल
Vedic Astro Lab एक AI साथी है, कोई मानव ज्योतिषी नहीं। पंचांग के समय समय चुनने के पारंपरिक तरीके हैं, भविष्यवाणी नहीं, और यहाँ दिए गए समय चुनी हुई जगह और तारीख के लिए निकाले गए हैं। किसी अनुष्ठान के लिए अपने पुरोहित या मंदिर का पंचांग देखें।