वैदिक ज्योतिष शब्दावली (Vedic astrology glossary)
वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष, Jyotish) में प्रयुक्त शब्दों की छोटी परिभाषाएँ, वर्णानुक्रम में।
अपनी कुंडली के बारे में ज्योतिषी से पूछें।
- अंतर्दशा (Antardasha)(भुक्ति (Bhukti), उप-दशा (sub-period))
- महादशा के भीतर आने वाली उप-अवधि। हर महादशा ग्रहों के क्रम में नौ अंतर्दशाओं में बँटी होती है, जिसकी शुरुआत स्वयं महादशा के ग्रह से होती है, और हर अंतर्दशा की लंबाई उस ग्रह के वर्षों के अनुपात में होती है।
- विंशोत्तरी दशा →विंशोत्तरी दशा कैलकुलेटर →
- अंतर्दशा स्वामी (Antardasha lord)
- चल रही उप-अवधि का स्वामी ग्रह। महादशा स्वामी के साथ मिलकर यह बताता है कि इस समय कौन-सी अवधि चल रही है, जैसे शनि-बुध।
- विंशोत्तरी दशा →विंशोत्तरी दशा कैलकुलेटर →
- अयनांश (Ayanamsa)
- सायन और निरयन राशिचक्र के बीच का कोण, जो फ़िलहाल लगभग 24 अंश है। सायन स्थिति में से इसे घटाने पर वह निरयन स्थिति मिलती है जिसका उपयोग वैदिक ज्योतिष में होता है।
- लाहिड़ी अयनांश →निरयन बनाम सायन राशि कैलकुलेटर →
- भकूट दोष (Bhakoot dosha)(भकुट दोष (Bhakut dosha))
- कुंडली मिलान में वह स्थिति जब दोनों की चंद्र राशियाँ एक-दूसरे से कुछ खास स्थानों पर हों, जैसे 2 और 12, 5 और 9, या 6 और 8। तब भकूट को अपने 7 अंकों में से 0 मिलता है। शास्त्रीय नियमों में दोनों राशियों का स्वामी एक हो या दोनों स्वामी मित्र हों तो यह दोष कट जाता है।
- 36 में से गुण मिलान स्कोर का मतलब →कुंडली मिलान (गुण मिलान) →मांगलिक दोष जाँच →
- भाव (Bhava)(घर (House))
- कुंडली के बारह भावों में से एक, जिनमें से हर एक जीवन के किसी क्षेत्र से जुड़ा माना जाता है। समान राशि भाव पद्धति (whole-sign) में हर भाव लग्न राशि से गिनी गई एक पूरी राशि होता है।
- बारह भाव (Bhavas) →लग्न कैलकुलेटर →
- अस्त (Combustion)(अस्त ग्रह (Asta))
- जब कोई ग्रह आकाश में सूर्य के बहुत पास होता है और उसे देख पाना कठिन हो जाता है, तो उसे अस्त कहा जाता है। परंपरा में अस्त ग्रह के विषयों को दबा हुआ या कठिनाई से व्यक्त होने वाला माना जाता है।
- नवग्रह (नौ ग्रह) →राशियाँ →
- दशा (Dasha)
- ग्रहों की अवधि। दशा पद्धतियाँ जीवन को बारी-बारी से किसी एक ग्रह के स्वामित्व वाली अवधियों में बाँटती हैं। सबसे ज़्यादा प्रयोग होने वाली पद्धति विंशोत्तरी दशा है।
- विंशोत्तरी दशा →विंशोत्तरी दशा कैलकुलेटर →
- नीच (Debilitation)(नीच राशि (Neecha))
- वह राशि जहाँ ग्रह को परंपरा में सबसे कमज़ोर या सबसे ज़्यादा तनाव में माना जाता है। यह हमेशा उच्च राशि के ठीक सामने होती है। उदाहरण के लिए, शनि मेष राशि में नीच का होता है।
- नवग्रह (नौ ग्रह) →राशियाँ →
- दोष (Dosha)
- कुंडली में असंतुलन या किसी कठिन योग के लिए प्रयुक्त पारंपरिक शब्द। किसी भी दोष को कितना महत्व देना है, इस पर ज्योतिषियों में बहुत मतभेद है, और शोध से यह नहीं दिखाया जा सकता कि कोई दोष घटनाओं का पूर्वानुमान देता है।
- नवग्रह (नौ ग्रह) →राशियाँ →
- उच्च (Exaltation)(उच्च राशि (Uchcha))
- वह राशि जहाँ ग्रह को परंपरा में सबसे बलवान और सबसे सहज माना जाता है। उदाहरण के लिए, सूर्य मेष में और चंद्र वृषभ में उच्च का होता है।
- नवग्रह (नौ ग्रह) →राशियाँ →
- गोचर (Gochara)(ट्रांज़िट (Transit))
- ग्रहों का अभी राशियों में चल रहा भ्रमण, जिसे जन्म कुंडली के सामने रखकर पढ़ा जाता है। आमतौर पर शनि और गुरु जैसे धीमे ग्रहों पर ध्यान दिया जाता है।
- साढ़े साती →जन्म कुंडली कैलकुलेटर →
- ग्रह (Graha)
- शाब्दिक अर्थ है 'पकड़ लेने वाला'। वैदिक ज्योतिष में प्रयुक्त नौ पिंड: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु।
- नवग्रह (नौ ग्रह) →राशियाँ →
- गुण मिलान (Gun Milan)(गुना मिलान (Guna Milan), अष्टकूट (Ashtakoota), कुंडली मिलान (kundli milan))
- कुंडली मिलान का पारंपरिक 36 अंकों का स्कोर। आठ कूट दोनों की चंद्र राशियों और नक्षत्रों की तुलना करते हैं; 18 अंक वह न्यूनतम स्तर है जिसे कई परिवार परंपरा से देखते हैं। यह चिंतन के लिए एक परिपाटी है, विवाह के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं।
- 36 में से गुण मिलान स्कोर का मतलब →कुंडली मिलान (गुण मिलान) →मांगलिक दोष जाँच →
- जन्म नक्षत्र (Janma nakshatra)(जन्म तारा (Birth star))
- जन्म के समय चंद्र जिस नक्षत्र में था वह नक्षत्र। यही विंशोत्तरी दशा का आरंभ बिंदु तय करता है।
- 27 नक्षत्र →नक्षत्र कैलकुलेटर →
- जन्म राशि (Janma rashi)(चंद्र राशि (Moon sign))
- जन्म के समय चंद्र जिस राशि में था वह राशि। वैदिक ज्योतिष में इसे कुंडली के सबसे महत्वपूर्ण भागों में गिना जाता है।
- चंद्र राशि कैलकुलेटर →राशियाँ →
- ज्योतिष (Jyotish)
- वैदिक ज्योतिष का संस्कृत नाम, जिसका अर्थ है प्रकाश का विज्ञान। यह छह वेदांगों में से एक है।
- वैदिक ज्योतिष क्या है? →वैदिक बनाम पाश्चात्य ज्योतिष →
- केंद्र (Kendra)
- चार कोण वाले भाव: पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ। परंपरा इनमें बैठे ग्रहों को विशेष रूप से दृश्यमान मानती है।
- बारह भाव (Bhavas) →लग्न कैलकुलेटर →
- केतु (Ketu)
- दक्षिण चंद्र पात, जो हमेशा राहु के ठीक सामने होता है। यह चंद्रमा की कक्षा का एक गणना किया हुआ बिंदु है, कोई पिंड नहीं, और परंपरा इसे वैराग्य और अंतर्दृष्टि से जोड़ती है।
- नवग्रह (नौ ग्रह) →राशियाँ →
- कुंडली (Kundli)(कुंडली (Kundali), जन्म कुंडली (birth chart))
- वैदिक जन्म चार्ट के लिए हिंदी शब्द: जन्म के क्षण और स्थान पर राशि और भाव के अनुसार ग्रहों का नक्शा।
- जन्म कुंडली कैलकुलेटर →वैदिक कुंडली कैसे पढ़ें →
- लग्न (Lagna)(उदय लग्न (Ascendant, rising sign))
- जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रही राशि। यही पहला भाव बनती है, और बाकी सभी भाव इसी से गिने जाते हैं।
- लग्न कैलकुलेटर →सूर्य, चंद्र और लग्न राशि →
- लाहिड़ी अयनांश (Lahiri ayanamsa)(चित्रपक्ष अयनांश (Chitrapaksha ayanamsa))
- भारत में सबसे ज़्यादा प्रयोग होने वाला अयनांश, जो तारा स्पाइका (चित्रा) को तुला राशि के आरंभ पर स्थिर रखकर तय किया जाता है। 2026 में यह लगभग 24.2 अंश है।
- आज का पंचांग →पंचांग के पाँच अंग →
- महादशा (Mahadasha)(मुख्य अवधि (Main period))
- विंशोत्तरी पद्धति की प्रमुख ग्रह अवधि। नौ महादशाएँ मिलाकर 120 वर्ष की होती हैं, और हर एक 6 से 20 वर्ष तक चलती है।
- विंशोत्तरी दशा →विंशोत्तरी दशा कैलकुलेटर →
- मांगलिक (Manglik)(मंगल दोष (Mangal dosha))
- लग्न, चंद्र या शुक्र से गिने जाने पर मंगल के कुछ खास भावों में बैठने की एक पारंपरिक धारणा। कौन-से भाव, कौन-से संदर्भ बिंदु और कौन-से अपवाद गिने जाएँ, इस पर स्रोत एकमत नहीं हैं, इसलिए एक ही कुंडली एक पद्धति में मांगलिक और दूसरी में मांगलिक नहीं हो सकती है।
- मांगलिक दोष जाँच →कुंडली मिलान (गुण मिलान) →बारह भाव (Bhavas) →
- मुहूर्त (Muhurta)
- किसी आयोजन, जैसे अनुष्ठान, के लिए चंद्र और ग्रहों की स्थिति देखकर शुभ माना गया समय। यही शब्द दिन के 48 मिनट के एक विभाजन के लिए भी प्रयुक्त होता है।
- आज का पंचांग →पंचांग के पाँच अंग →
- नाड़ी दोष (Nadi dosha)
- कुंडली मिलान में वह स्थिति जब दोनों की नाड़ी एक ही हो (आदि, मध्य या अंत्य)। तब नाड़ी को अपने 8 अंकों में से 0 मिलता है। शास्त्रीय नियमों में दोनों के नक्षत्र अलग हों या दोनों के पद अलग हों तो यह दोष कट जाता है।
- कुंडली मिलान में नाड़ी दोष →कुंडली मिलान (गुण मिलान) →
- नक्षत्र (Nakshatra)(चंद्र मंडल (Lunar mansion))
- राशिचक्र के 27 बराबर भागों में से एक, हर एक 13 अंश 20 कला चौड़ा, जिसका उपयोग चंद्रमा की स्थिति बताने और दशा चक्र शुरू करने में होता है।
- 27 नक्षत्र →नक्षत्र कैलकुलेटर →
- पद (Pada)(चरण (Quarter))
- नक्षत्र का एक चौथाई भाग, 3 अंश 20 कला चौड़ा। 27 नक्षत्रों में से हर एक में चार पद होते हैं, जो कुल मिलाकर 108 होते हैं।
- 27 नक्षत्र →नक्षत्र कैलकुलेटर →
- पंचांग (Panchang)
- हिंदू पंचांग, जिसमें दिन के पाँच अंग दिए होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इसका उपयोग आयोजनों का समय चुनने में होता है।
- आज का पंचांग →पंचांग के पाँच अंग →
- राहु (Rahu)
- उत्तर चंद्र पात, वह बिंदु जहाँ चंद्रमा की कक्षा सूर्य के पथ को उत्तर की ओर जाते हुए काटती है। यह गणना किया हुआ बिंदु है, जो राशिचक्र में हमेशा उलटी दिशा में चलता है, और महत्वाकांक्षा तथा बेचैनी से जुड़ा माना जाता है।
- नवग्रह (नौ ग्रह) →राशियाँ →
- राशि (Rashi)(राशि चिह्न (Sign))
- राशिचक्र की बारह राशियों में से एक, हर एक 30 अंश चौड़ी। वैदिक ज्योतिष में राशियाँ निरयन राशिचक्र पर मापी जाती हैं।
- चंद्र राशि कैलकुलेटर →राशियाँ →
- वक्री (Retrograde)(वक्री ग्रह (Vakri))
- जब कोई ग्रह पृथ्वी से देखने पर तारों के सापेक्ष पीछे की ओर चलता दिखाई देता है। यह एक दृष्टि-भ्रम है। सूर्य और चंद्र कभी वक्री नहीं होते, और राहु-केतु को हमेशा वक्री दिखाया जाता है।
- नवग्रह (नौ ग्रह) →राशियाँ →
- साढ़े साती (Sade Sati)
- लगभग साढ़े सात वर्ष की वह अवधि जब शनि चंद्र राशि से पहले वाली राशि, चंद्र राशि और उसके बाद वाली राशि से गुज़रता है, हर राशि में करीब ढाई वर्ष।
- साढ़े साती →साढ़ेसाती कैलकुलेटर →
- निरयन राशिचक्र (Sidereal zodiac)
- स्थिर तारों के सापेक्ष मापा गया राशिचक्र। वैदिक ज्योतिष में यही राशिचक्र प्रयुक्त होता है और अयन गति के कारण यह सायन राशिचक्र से लगभग 24 अंश पीछे रहता है।
- निरयन बनाम सायन राशि कैलकुलेटर →वैदिक बनाम पाश्चात्य ज्योतिष →
- सायन राशिचक्र (Tropical zodiac)
- मार्च विषुव से मापा गया राशिचक्र, इसलिए यह ऋतुओं का अनुसरण करता है। पश्चिमी ज्योतिष में यही राशिचक्र प्रयुक्त होता है।
- निरयन बनाम सायन राशि कैलकुलेटर →वैदिक बनाम पाश्चात्य ज्योतिष →
- त्रिकोण (Trikona)
- त्रिकोण भाव: पहला, पाँचवाँ और नौवाँ। परंपरा इन्हें विशेष रूप से सहायक मानती है।
- बारह भाव (Bhavas) →लग्न कैलकुलेटर →
- विंशोत्तरी दशा (Vimshottari dasha)
- सबसे ज़्यादा प्रयोग होने वाली दशा पद्धति: नौ ग्रह अवधियों का 120 वर्ष का चक्र, जो चंद्रमा के जन्म नक्षत्र के स्वामी ग्रह से शुरू होता है।
- विंशोत्तरी दशा →विंशोत्तरी दशा कैलकुलेटर →
- समान राशि भाव पद्धति (Whole-sign houses)
- ऐसी भाव पद्धति जिसमें उदय हो रही लग्न राशि पूरी की पूरी पहला भाव होती है, अगली राशि दूसरा भाव, और इसी तरह आगे। यह शास्त्रीय विधि है और Vedic Astro Lab इसी का प्रयोग करता है।
- बारह भाव (Bhavas) →लग्न कैलकुलेटर →
- योग (Yoga)
- ज्योतिष में ग्रहों, राशियों या भावों का एक नामित संयोजन, जिसका परंपरा में कोई खास अर्थ माना जाता है। यह व्यायाम के रूप में किए जाने वाले योग से अलग है।
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