वैदिक और पाश्चात्य ज्योतिष (Vedic vs Western astrology): असल में अंतर क्या है?
मुख्य अंतर राशिचक्र का है। वैदिक ज्योतिष निरयन राशिचक्र इस्तेमाल करता है, जो तारों से बँधा है, और पाश्चात्य ज्योतिष सायन राशिचक्र, जो ऋतुओं से बँधा है। आज दोनों में लगभग 24 अंश का फ़र्क़ है, इसलिए ज़्यादातर लोगों की वैदिक राशि उनकी पाश्चात्य राशि से एक पहले वाली राशि होती है।
अपनी कुंडली के बारे में ज्योतिषी से पूछें।
आमने-सामने तुलना
| वैदिक (ज्योतिष) | पाश्चात्य | |
|---|---|---|
| राशिचक्र | निरयन (तारों से बँधा) | सायन (विषुव से बँधा) |
| शुरुआती बिंदु | लाहिड़ी अयनांश, जो सायन राशिचक्र से लगभग 24 अंश पीछे है | मार्च का विषुव (equinox) मेष का 0 अंश है |
| सबसे ज़्यादा महत्व वाली राशि | चंद्र राशि और लग्न | सूर्य राशि |
| भाव | आमतौर पर पूर्ण-राशि (whole-sign) | अक्सर प्लेसिडस या दूसरी चतुर्थांश पद्धतियाँ |
| इस्तेमाल होने वाले ग्रह | सात दृश्य पिंड और राहु-केतु (चंद्र बिंदु) | आमतौर पर यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो भी जुड़ते हैं |
| समय निकालने की विधि | दशा, जो चंद्रमा के नक्षत्र से चलती है | गोचर और प्रोग्रेशन |
| चंद्रमा के पड़ाव | 27 नक्षत्र | इस्तेमाल नहीं होते |
आपकी राशि क्यों बदल जाती है
पृथ्वी की धुरी धीरे-धीरे डगमगाती है, जिससे विषुव तारों के सापेक्ष लगभग हर 72 वर्ष में एक अंश खिसक जाता है। लाहिड़ी की गणना के अनुसार दोनों राशिचक्र लगभग 285 ई. में एक सीध में थे, और तब से करीब 24 अंश दूर हो चुके हैं। वैदिक ज्योतिष राशियों को तारों पर टिकाए रखता है, इसलिए साल के ज़्यादातर समय सूर्य वैदिक और पाश्चात्य पद्धति में अलग राशि में होता है।
अगर आपकी पाश्चात्य सूर्य राशि वृषभ (Taurus) है, तो आपकी वैदिक सूर्य राशि आमतौर पर मेष होगी। जो ग्रह किसी सायन राशि के आख़िरी छह अंश के आसपास होते हैं, वे दोनों पद्धतियों में एक ही राशि में रहते हैं।
आपको कौन-सी पद्धति इस्तेमाल करनी चाहिए?
दोनों अलग-अलग सवालों के जवाब देती हैं और कोई भी गणना की ग़लती नहीं है। बहुत से लोग उसी परंपरा को अपनाते हैं जिसमें वे पले-बढ़े हैं। अगर आप दोनों राशिचक्रों में अपनी राशियाँ साथ-साथ देखना चाहते हैं, तो निरयन बनाम सायन राशि कैलकुलेटर दोनों को एक साथ दिखा देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या वैदिक ज्योतिष पाश्चात्य ज्योतिष से ज़्यादा सटीक है?
दोनों सटीक खगोलीय गणना इस्तेमाल करते हैं। फ़र्क़ संदर्भ ढाँचे का है और इस बात का कि कुंडली की व्याख्या कैसे की जाती है। शोध में दोनों में से किसी के भी घटनाओं की भविष्यवाणी करने की बात साबित नहीं हुई है।
मेरी वैदिक सूर्य राशि मेरी ज़ोडिएक साइन से अलग क्यों है?
वैदिक ज्योतिष निरयन राशिचक्र इस्तेमाल करता है और पाश्चात्य ज्योतिष सायन राशिचक्र। इन दोनों में लगभग 24 अंश का अंतर है।
क्या वैदिक ज्योतिष में सूर्य राशि का इस्तेमाल होता है?
हाँ, लेकिन इस परंपरा में चंद्र राशि और लग्न को ज़्यादा महत्व मिलता है।
अपनी कुंडली पर बात करना चाहते हैं?
आपका ज्योतिषी आपकी गणना की गई वैदिक कुंडली पढ़ता है और आपकी बातचीत याद रखता है। पहले 90 सेकंड मुफ़्त हैं।