श्रवण नक्षत्र (Shravana nakshatra) का वैदिक ज्योतिष में अर्थ
श्रवण का अर्थ सुनना है। इसे सीखने, सुनने और ज्ञान आगे पहुँचाने से जोड़ा जाता है। श्रवण 27 नक्षत्रों में 22 वाँ है और इसके स्वामी चंद्र हैं।
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श्रवण के प्रमुख तथ्य
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| क्रम | 27 में 22 वाँ |
| स्वामी ग्रह | चंद्र |
| देवता | विष्णु, पालनकर्ता |
| प्रतीक | कान, या तीन पदचिह्न |
| गण (स्वभाव) | देव (दिव्य) |
| राशिचक्र में विस्तार | 10°00' से 23°20' मकर |
| राशि | मकर |
| योनि (पशु) | बंदरिया (मादा) |
| नाड़ी | अंत्य (कफ) |
श्रवण का अर्थ
श्रवण का अर्थ है “सुनना”, जो धातु श्रु (सुनना) से बना है। इसके तीन तारे, जिनमें अल्टेयर (Altair) भी है, कान या तीन पदचिह्न के रूप में दर्शाए जाते हैं।
श्रवण के देवता विष्णु हैं, पालनकर्ता। तीन पदचिह्न विष्णु के वामन अवतार की याद दिलाते हैं, उस बौने की जिसने दैत्यराज बलि से तीन पग भूमि माँगी और फिर उन्हीं पगों में पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग नाप लिए। विष्णु संतुलन लौटाते हैं और संसार को स्थिर रखते हैं। श्रवण का नाता उस पवित्र ज्ञान से भी है जो सुनकर आगे पहुँचाया गया, जैसे वेद पहुँचे। इसके विषय हैं सुनना, सीखना, पीढ़ियों से चला आता ज्ञान और जो अच्छा है उसे सहेजने की समझ।
जन्म नक्षत्र के रूप में श्रवण
परंपरा में श्रवण में चंद्र वाले व्यक्ति को अच्छा श्रोता और सीखने वाला, विचारशील बताया गया है, जो पढ़ाने, कहानियों और सलाह की ओर खिंचता है।
परंपरा से जुड़ी खूबियाँ
- बहुत अच्छा सुनना
- सीखने के प्रति लगन
- पढ़ाने और कहानी कहने की प्रतिभा
- चीज़ों को स्थिर रखने की क्षमता
किन बातों का ध्यान रखें
- आलोचना के प्रति संवेदनशीलता
- लोग क्या कहेंगे इसकी चिंता
काम और पेशा
श्रवण का संबंध शिक्षण, काउंसलिंग, भाषाविज्ञान, मीडिया और प्रसारण से जोड़ा जाता है। इसका सुनने वाला स्वभाव मनोविज्ञान, संगीत, ऑडियो इंजीनियरिंग और अनुवाद के अनुकूल है। परंपरा में पुरोहितों, कथावाचकों और मार्गदर्शकों का नाम आता है। आधुनिक ज्योतिषी इसमें पॉडकास्टिंग, शिक्षा, शोध, यात्रा गाइड और ज्ञान को सहेजने वाली भूमिकाएँ, जैसे पुस्तकालय और अभिलेखागार, जोड़ते हैं।
रिश्तों में
श्रवण को ध्यान देने वाला, समर्पित और विचारशील बताया गया है, ऐसा साथी जो अच्छी तरह सुनता है और ज़रूरी बातें याद रखता है। यह सामंजस्य और अच्छे संवाद को महत्व देता है। यह आलोचना के प्रति संवेदनशील हो सकता है, इसलिए मीठे शब्द बहुत काम आते हैं। इसकी बंदरिया योनि का स्वाभाविक जोड़ पूर्वाषाढ़ा के साथ बताया जाता है।
श्रवण के चार पद
हर नक्षत्र चार चौथाइयों में बँटा होता है, जिन्हें पद कहते हैं, और हर पद 3°20' का होता है। हर पद एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है, जो नक्षत्र को पढ़ने का रंग बदलती है और नाम के पारंपरिक पहले अक्षर का भी आधार है।
| पद | विस्तार | नवांश राशि |
|---|---|---|
| पद 1 | 10°00' से 13°20' मकर | मेष |
| पद 2 | 13°20' से 16°40' मकर | वृषभ |
| पद 3 | 16°40' से 20°00' मकर | मिथुन |
| पद 4 | 20°00' से 23°20' मकर | कर्क |
इसे कैसे पढ़ें
ये पारंपरिक संबंध हैं, ऐसा विवरण नहीं जो हर किसी पर बैठता हो। नक्षत्र कुंडली का सिर्फ़ एक हिस्सा है: चंद्र की राशि, बाक़ी ग्रह, भाव और दशा, सब मिलकर तय करते हैं कि इसे कैसे पढ़ा जाए। इसे आत्म-चिंतन के एक संकेत की तरह इस्तेमाल करें।
गुण मिलान में तारा, योनि, गण और नाड़ी, दोनों जन्म नक्षत्रों से पढ़े जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रवण नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन सा है?
श्रवण के स्वामी चंद्र हैं। अगर जन्म के समय आपका चंद्र श्रवण में था, तो आपकी विंशोत्तरी दशा इसी ग्रह की दशा से शुरू होती है।
श्रवण नक्षत्र किस राशि में आता है?
श्रवण का विस्तार 10°00' से 23°20' मकर है, इसलिए यह मकर राशि में आता है।
श्रवण नक्षत्र के देवता कौन हैं?
श्रवण के अधिष्ठाता देवता विष्णु, पालनकर्ता हैं।
अपना जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?
जन्म के समय आपका चंद्र जिस नक्षत्र में था, वही आपका जन्म नक्षत्र है। अपनी जन्म तारीख़, समय और स्थान डालकर मुफ़्त नक्षत्र कैलकुलेटर से इसे जाँचें।
कुंडली मिलान कर रहे हैं? नाड़ी, योनि और गण, गुण मिलान की तीन जाँचें, नक्षत्र से ही तय होती हैं। मुफ़्त गुण मिलान (कुंडली मिलान) टूल आज़माएँ।
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