रेवती नक्षत्र (Revati nakshatra) का वैदिक ज्योतिष में अर्थ
रेवती अंतिम नक्षत्र है और राशिचक्र का अंत। इसे सुरक्षित यात्रा, करुणा और पूर्णता से जोड़ा जाता है। रेवती 27 नक्षत्रों में 27 वाँ है और इसके स्वामी बुध हैं।
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रेवती के प्रमुख तथ्य
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| क्रम | 27 में 27 वाँ |
| स्वामी ग्रह | बुध |
| देवता | पूषन, यात्रियों और पशुओं के रक्षक |
| प्रतीक | मछली, या ढोल |
| गण (स्वभाव) | देव (दिव्य) |
| राशिचक्र में विस्तार | 16°40' से 30°00' मीन |
| राशि | मीन |
| योनि (पशु) | हथिनी (मादा) |
| नाड़ी | अंत्य (कफ) |
रेवती का अर्थ
रेवती का अर्थ है “धनी” या “समृद्ध”। यह अंतिम नक्षत्र है, जिसे मछली या ढोल के रूप में दर्शाया जाता है।
रेवती के देवता पूषन हैं, जो आदित्यों में से एक हैं। ऋग्वेद में पूषन मार्गों, यात्रियों और पशुओं के रक्षक हैं; वे खोई हुई गायें ढूँढ़ते हैं, यात्राओं की रक्षा करते हैं और दिवंगत आत्माओं को सुरक्षित अगले लोक तक पहुँचाते हैं। उन्हें अंकुश और बकरों से खिंचे रथ के साथ दर्शाया जाता है। पूषन पोषण और रक्षा करते हैं। इसलिए रेवती में सुरक्षित मार्ग, करुणा, पूर्णता और कमज़ोरों की देखभाल का भाव है: राशिचक्र का अंत और आगे आने वाले का कोमल मार्गदर्शक।
जन्म नक्षत्र के रूप में रेवती
परंपरा में रेवती में चंद्र वाले व्यक्ति को दयालु और कल्पनाशील बताया गया है, जो कमज़ोरों की रक्षा करता है और यात्राओं, कला और देखभाल वाले काम की ओर खिंचता है।
परंपरा से जुड़ी खूबियाँ
- दयालुता और करुणा
- रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति
- कमज़ोरों के प्रति संरक्षण का भाव
- दूसरों को राह दिखाने की प्रतिभा
किन बातों का ध्यान रखें
- ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा कर लेना
- कठोर सच्चाइयों से जूझने में कठिनाई
काम और पेशा
रेवती का संबंध यात्रा, परिवहन, जहाज़रानी और दूसरों को सुरक्षित मार्ग दिखाने से माना जाता है। इसकी करुणा नर्सिंग, सामाजिक कार्य, दान और पशुओं की देखभाल के अनुकूल है। स्वामी बुध होने से इसमें लेखन, प्रकाशन और कलाएँ जुड़ती हैं। आधुनिक ज्योतिषी काउंसलिंग, संगीत, फ़िल्म, फ़ोटोग्राफ़ी और आध्यात्मिक काम का ज़िक्र करते हैं।
रिश्तों में
रेवती को कोमल, देखभाल करने वाला और कल्पनाशील बताया गया है, ऐसा साथी जो बहुत कुछ देता है और सामंजस्य चाहता है। यह रक्षा करने वाला और क्षमा करने वाला है। यह ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा कर सकता है, इसलिए भरोसेमंद साथी मदद करता है। इसकी हथिनी योनि का स्वाभाविक जोड़ भरणी के साथ बताया जाता है।
रेवती के चार पद
हर नक्षत्र चार चौथाइयों में बँटा होता है, जिन्हें पद कहते हैं, और हर पद 3°20' का होता है। हर पद एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है, जो नक्षत्र को पढ़ने का रंग बदलती है और नाम के पारंपरिक पहले अक्षर का भी आधार है।
| पद | विस्तार | नवांश राशि |
|---|---|---|
| पद 1 | 16°40' से 20°00' मीन | धनु |
| पद 2 | 20°00' से 23°20' मीन | मकर |
| पद 3 | 23°20' से 26°40' मीन | कुंभ |
| पद 4 | 26°40' से 30°00' मीन | मीन |
इसे कैसे पढ़ें
ये पारंपरिक संबंध हैं, ऐसा विवरण नहीं जो हर किसी पर बैठता हो। नक्षत्र कुंडली का सिर्फ़ एक हिस्सा है: चंद्र की राशि, बाक़ी ग्रह, भाव और दशा, सब मिलकर तय करते हैं कि इसे कैसे पढ़ा जाए। इसे आत्म-चिंतन के एक संकेत की तरह इस्तेमाल करें।
गुण मिलान में तारा, योनि, गण और नाड़ी, दोनों जन्म नक्षत्रों से पढ़े जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रेवती नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन सा है?
रेवती के स्वामी बुध हैं। अगर जन्म के समय आपका चंद्र रेवती में था, तो आपकी विंशोत्तरी दशा इसी ग्रह की दशा से शुरू होती है।
रेवती नक्षत्र किस राशि में आता है?
रेवती का विस्तार 16°40' से 30°00' मीन है, इसलिए यह मीन राशि में आता है।
रेवती नक्षत्र के देवता कौन हैं?
रेवती के अधिष्ठाता देवता पूषन, यात्रियों और पशुओं के रक्षक हैं।
अपना जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?
जन्म के समय आपका चंद्र जिस नक्षत्र में था, वही आपका जन्म नक्षत्र है। अपनी जन्म तारीख़, समय और स्थान डालकर मुफ़्त नक्षत्र कैलकुलेटर से इसे जाँचें।
कुंडली मिलान कर रहे हैं? नाड़ी, योनि और गण, गुण मिलान की तीन जाँचें, नक्षत्र से ही तय होती हैं। मुफ़्त गुण मिलान (कुंडली मिलान) टूल आज़माएँ।
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