मूल नक्षत्र (Mula nakshatra) का वैदिक ज्योतिष में अर्थ
मूल का अर्थ जड़ है। इसे चीज़ों की तह तक पहुँचने, उखाड़ने और नींव से फिर शुरू करने से जोड़ा जाता है। मूल 27 नक्षत्रों में 19 वाँ है और इसके स्वामी केतु हैं।
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मूल के प्रमुख तथ्य
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| क्रम | 27 में 19 वाँ |
| स्वामी ग्रह | केतु |
| देवता | निरृति, विघटन की देवी |
| प्रतीक | बँधी हुई जड़ों का गुच्छा |
| गण (स्वभाव) | राक्षस (उग्र) |
| राशिचक्र में विस्तार | 0°00' से 13°20' धनु |
| राशि | धनु |
| योनि (पशु) | कुत्ता (नर) |
| नाड़ी | आदि (वात) |
मूल का अर्थ
मूल का अर्थ है “जड़”। इसके तारे वृश्चिक की पूँछ बनाते हैं, जो आकाशगंगा के केंद्र के पास है, और इसे आपस में बँधी जड़ों के गुच्छे के रूप में दर्शाया जाता है।
मूल की देवी निरृति हैं, विघटन की देवी। वेदों में वे क्षय और दुर्भाग्य की शक्ति हैं, वह जो उसे बिखेर देती है जो व्यवस्था में जमा हुआ नहीं है, और उन्हें घर से दूर रखने के लिए आहुतियाँ दी जाती थीं। फिर भी विघटन नवीनीकरण की शुरुआत भी है: नई ज़मीन पर रोपने से पहले जड़ें उखाड़नी पड़ती हैं। इसलिए मूल में चीज़ों की जड़ तक पहुँचने, नींव पर सवाल उठाने और जो अब टिकता नहीं उसे छोड़ देने की चाह है।
जन्म नक्षत्र के रूप में मूल
परंपरा में मूल में चंद्र वाले व्यक्ति को खोजी और तीव्र बताया गया है, जो सच की ओर खिंचता है और छोड़ने तथा फिर से बनाने के चक्रों से गुज़रता है।
परंपरा से जुड़ी खूबियाँ
- गहरे सच की तलाश
- फिर से शुरू करने का साहस
- जाँच-पड़ताल की कुशलता
- नुक़सान के बाद संभलने की ताक़त
किन बातों का ध्यान रखें
- चीज़ों को बहुत जल्दी तोड़ देना
- बेचैनी और असंतोष
काम और पेशा
मूल का संबंध शोध, जाँच, दर्शन और आध्यात्मिक अध्ययन से जोड़ा जाता है। जड़ों से इसका जुड़ाव वनस्पति विज्ञान, जड़ी-बूटी चिकित्सा, खेती और खनन के अनुकूल है। परंपरा में उनका भी नाम आता है जो अंत से जुड़े काम करते हैं, तोड़-फोड़ से लेकर हॉस्पिस देखभाल तक। आधुनिक ज्योतिषी इसमें विज्ञान, डेटा विश्लेषण, जासूसी और हर वह क्षेत्र जोड़ते हैं जो किसी समस्या की तह तक जाता है।
रिश्तों में
मूल को ईमानदार, तीव्र और खोजी बताया गया है, ऐसा साथी जो चाहता है कि रिश्ता आरामदेह होने से ज़्यादा सच्चा हो। यह छोड़ने और फिर से बनाने के चक्रों से गुज़र सकता है। धैर्य और गहरी बातचीत के लिए खुलापन इसके अनुकूल है। इसकी कुत्ता योनि का स्वाभाविक जोड़ आर्द्रा के साथ बताया जाता है।
मूल के चार पद
हर नक्षत्र चार चौथाइयों में बँटा होता है, जिन्हें पद कहते हैं, और हर पद 3°20' का होता है। हर पद एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है, जो नक्षत्र को पढ़ने का रंग बदलती है और नाम के पारंपरिक पहले अक्षर का भी आधार है।
| पद | विस्तार | नवांश राशि |
|---|---|---|
| पद 1 | 0°00' से 3°20' धनु | मेष |
| पद 2 | 3°20' से 6°40' धनु | वृषभ |
| पद 3 | 6°40' से 10°00' धनु | मिथुन |
| पद 4 | 10°00' से 13°20' धनु | कर्क |
इसे कैसे पढ़ें
ये पारंपरिक संबंध हैं, ऐसा विवरण नहीं जो हर किसी पर बैठता हो। नक्षत्र कुंडली का सिर्फ़ एक हिस्सा है: चंद्र की राशि, बाक़ी ग्रह, भाव और दशा, सब मिलकर तय करते हैं कि इसे कैसे पढ़ा जाए। इसे आत्म-चिंतन के एक संकेत की तरह इस्तेमाल करें।
गुण मिलान में तारा, योनि, गण और नाड़ी, दोनों जन्म नक्षत्रों से पढ़े जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मूल नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन सा है?
मूल के स्वामी केतु हैं। अगर जन्म के समय आपका चंद्र मूल में था, तो आपकी विंशोत्तरी दशा इसी ग्रह की दशा से शुरू होती है।
मूल नक्षत्र किस राशि में आता है?
मूल का विस्तार 0°00' से 13°20' धनु है, इसलिए यह धनु राशि में आता है।
मूल नक्षत्र के देवता कौन हैं?
मूल के अधिष्ठाता देवता निरृति, विघटन की देवी हैं।
अपना जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?
जन्म के समय आपका चंद्र जिस नक्षत्र में था, वही आपका जन्म नक्षत्र है। अपनी जन्म तारीख़, समय और स्थान डालकर मुफ़्त नक्षत्र कैलकुलेटर से इसे जाँचें।
कुंडली मिलान कर रहे हैं? नाड़ी, योनि और गण, गुण मिलान की तीन जाँचें, नक्षत्र से ही तय होती हैं। मुफ़्त गुण मिलान (कुंडली मिलान) टूल आज़माएँ।
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